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तकनीक के प्रयोग से भ्रष्टाचार में कमी या बढ़ोतरी?

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तकनीक के प्रयोग से भ्रष्टाचार में कमी या बढ़ोतरी?

किसी भी देश की सरकार के लिए भ्रष्टाचार को समाप्त करना या सीमित करना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहता है। समाजशास्त्र की अवधारणाओं के अनुसार इसकी सर्वोत्तम विधि समाज के लोगों की सोच को बेहतर बनाना है। यदि समाज के लोग बेहतर सोच वाले व उच्च चरित्र वाले होते हैं, तो उस समाज में भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं रहता परंतु वास्तव में यह एक लंबी व जटिल प्रक्रिया है। इसमें बच्चों को बचपन से ही नैतिक शिक्षा की सीख दे कर देश, राज्य व समाज के लिए कर्तव्यों के प्रति जागरूक करके सभी तरह के अपराधों (जिसमें भ्रष्टाचार भी शामिल है) को दूर किया जा सकता है। यह एक स्थायी व सर्वोत्तम प्रक्रिया है।

परंतु तकनीक वह हथियार है जिसका प्रयोग करके बहुत कम समय में भ्रष्टाचार को खत्म या न्यून किया जा सकता है। किन-किन क्षेत्रों में इसका प्रयोग किस प्रकार हो सकता है इसके उदाहरण निम्नलिखित हैं।

अनिवार्य उपस्थिति

 आजकल पेमेंट दफ्तरों में उपस्थिति अर्थात अटेंडेंस को दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक सेंसस का प्रयोग किया जाता है इसमें व्यक्ति ऑफिस में प्रवेश करते समय अपने फिंगरप्रिंट दर्ज कराता है तत्पश्चात उसके लिए दरवाजे खुलते हैं ठीक इसी प्रकार दफ्तर छोड़ते समय भी इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिससे दफ्तर छोड़ने का समय भी दर्ज हो जाता है।
इससे सरकारी दफ्तरों में भी पूर्व की तुलना में उपस्थिति बेहतर बन रही है और लोगों की कार्य क्षमता में भी वृद्धि हो रही है।

फील्ड जॉब में जीपीएस का प्रयोग

पुलिस की जॉब या इस प्रकार की अन्य जॉब जिसमें एक ऑफिस में ना बैठ कर के कर्मचारियों को क्षेत्र विशेष में जाकर अपनी सेवाएं देनी होती हैं ऐसे व्यक्तियों की मोबाइल फोन में अनिवार्य रूप से जीपीएस ऑन करने के लिए बाध्य किया जाता है ताकि उनकी उपस्थिति या यूं कहें कि उनकी लोकेशन को ट्रेस किया जा सके जिससे यह दर्ज हो सकता है कि अमुख व्यक्ति अमुख अमुख स्थान पर कितने समय रुका या किस गति से यात्रा की आदि।

पैसों का खातों में सीधा ट्रांसफर होना।

आजकल सभी दफ्तर लोगों की सैलरी मजदूरी या फिर सरकार द्वारा प्राप्त होने वाली सब्सिडी सभी कुछ संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में सीधी पहुंच जाती है जिससे बिचौलिए का रोल समाप्त हो जाता है व संबंधित व्यक्ति तक पूरा पैसा पहुंच पाता है।


टैक्स चोरी को सीमित करना।

वर्तमान में रुपए पैसे के लेनदेन में यदि बड़ी रकम का प्रयोग होता है तो उसका ट्रांजैक्शन कैश के रूप में ना हो करके ऑनलाइन माध्यमों से करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कारण बड़े ट्रांजैक्शंस को ट्रेस करना सरकार के लिए आसान हो जाता है और ब्लैक मनी व कर चोरी को इस प्रकार सीमित किया जा रहा है।

डुप्लीकेसी को समाप्त करना।

कई बार कुछ लोग अपना नाम कई जगह दर्ज करके सभी जगह से सरकारी योजनाओं या इस प्रकार की अन्य सुविधाओं का लाभ उठा लिया करते थे। परंतु आधार कार्ड जैसे यूनिक नंबर होने के कारण पूरे डेटाबेस में से ऐसे लोगों की पहचान करना काफी सरल हो गया है जिससे योजनाओं का लाभ अधिकतम व्यक्तियों तक पहुंचाया जा सकता है।

इन सब खूबियों के बावजूद तकनीक के अधिक प्रयोग के अपने खतरे हैं उदाहरण के लिए ऑनलाइन एग्जाम पद्धति आने के बावजूद उस में पारदर्शिता लाने में संस्थाएं असफल रही हैं। उसी प्रकार कई लोगों ने तकनीक का ही प्रयोग करके गलत तरीके से बड़े-बड़े ट्रांजैक्शन करके पैसों की ठगाई की है।
पर साथ ही यह भी सच है कि इस तरह की घटनाओं को भी तकनीक का बेहतर प्रयोग करके और उसके बारे में लोगों को जागरूक करके ही दूर किया जा सकता है।


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