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वीडियो गेम का प्रभाव बच्चों के कोमल मन पर कितना पड़ता है?

वीडियो गेम का प्रभाव बच्चों के कोमल मन पर कितना पड़ता है?



वीडियो गेम का प्रभाव बच्चों के कोमल मन पर कितना पड़ता है?

बच्चों का मन कच्चे घड़े के समान होता है। उसे हम जिस भी दिशा में मोड़ना चाहें वह अपेक्षाकृत आसानी से मोड़ा जा सकता है। हिंदू संस्कृति में जब बच्चा मां के गर्भ में होता है तभी से ही संस्कार देने की प्रथा है, क्योंकि उनका विश्वास है कि एक बच्चा मां के गर्भ से ही सीखना प्रारंभ कर देता है। महाभारत के अभिमन्यु की कहानी हमें बताती है कि कैसे एक बच्चा मां के गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदन सीख लेता है।

बच्चे और खेल एक-दूसरे के पर्याय रहे हैं खेलों के बहुत सारे लाभ हैं जैसे कि समूह में काम करना, हार व जीत दोनों परिस्थितियों को सहर्ष स्वीकार करना साथ ही शारीरिक व मानसिक विकास के लिए भी खेल अनिवार्य हैं। परंतु बढ़ती आबादी, छोटे-छोटे घर व मैदानों के अभाव के कारण बच्चे आउटडोर की बजाय इंडोर खेलों को तरजीह देने लगे हैं।

वर्तमान में वीडियो गेम जो टीवी, प्लेस्टेशन या मोबाइल के माध्यम से खेला जाता है वह बहुत अधिक हावी हो चुका है। बच्चे लगातार घंटों तक मोबाइल में यह गेम खेल कर अपना समय व्यतीत करते रहते हैं। एक बार में तो ऐसा प्रतीत होता है कि खेल ही तो है पर वास्तव में इसका प्रभाव दूरगामी है जो आने वाले कई पीढ़ियों को प्रभावित कर सकता है यहां हम अत्यधिक वीडियो गेम खेलने से पैदा होने वाले प्रभावों के बारे में चर्चा करेंगे।

सीमित दुनिया

अत्यधिक वीडियो गेम खेलने वाले बच्चों की दुनिया उसी के इर्द-गिर्द घूमती रहती है बच्चे उसके बाहर सोंच नहीं पाते जो उनके सर्वांगीण विकास में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।


हिंसा का सामान्य बन जाना 

अधिकतर पॉपुलर वीडियो गेम हिंसा पर आधारित हैं। बच्चे जब घंटो तक इन गेमों को रोज खेलते हैं तो उनके लिए हिंसा एक सामान्य सी बात होती चली जाती है, जिससे उनके अंदर करुणा का भाव कम होता चला जाता है। वे अपने जीवन में कई बार अपने साथियों पर हिंसा का प्रयोग इस सीमा तक कर लेते हैं जिससे कई बार उनकी जान तक चली जाती है। पिछले कुछ वर्षों में इस प्रकार की घटनाएं बढ़ती चली जा रही हैं।

परिवार के प्रति नकारात्मकता का भाव उत्पन्न होना

 अत्यधिक वीडियो गेम खेलने पर कई बार माता-पिता या घर के अन्य बड़े लोग उन्हें जब ऐसा करने से रोकते हैं तो वे उन्हें अपना दुश्मन समझना प्रारंभ कर देते हैं और उनके प्रति आदर का भाव समाप्त कर अन्य नकारात्मक भाव उत्पन्न कर लेते हैं।

पारिवारिक संवाद हीनता

 मोबाइल का प्रयोग आसान होने से बच्चे 6 -7 या कई बार 10 -10 घंटों तक वीडियो गेम खेलने के आदी हो जाते हैं जिससे परिवार के सदस्यों से उनकी बातचीत हो ही नहीं पाती और संवाद हीनता की स्थिति बनती जाती है। विभिन्न रिसर्च बताती हैं कि यदि परिवार में संवाद हीनता की स्थिति बहुत समय तक बनी रहे तो बच्चों के मन पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

आंखों को नुकसान

 बहुत समय तक लगातार स्क्रीन पर निगाह गड़ाए रखने के कारण आंखों की मांसपेशियां बुरी तरह प्रभावित होती हैं और छोटे-छोटे बच्चों की आंखों पर कई बार मोटे-मोटे चश्मे लग जाते हैं।

शारीरिक विकास में बाधा 

लगातार एक ही स्थान पर बैठकर गेम खेलने से उनके शारीरिक अंगों के चलने फिरने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है और उनका स्वास्थ्य इससे प्रभावित होता है जिससे वे मोटापे के शिकार हो जाते हैं बहुत जल्दी थक जाते हैं।

खेलों का उद्देश्य वास्तव में बहुत सकारात्मक है जिसकी चर्चा हम ऊपर कर चुके हैं परंतु वीडियो गेम का उद्देश्य इससे भिन्न है, जो मानव जाति के किसी उद्देश्य को पूरा नहीं करता गेम को बहुत सावधानी पूर्वक तथा बहुत ही सीमित मात्रा में खेलना चाहिए। बल्कि इसके स्थान पर हमें उन आउटडोर गेमों को तरजीह देनी चाहिए जो हर तरह से हमारे लिए लाभदायक है।
माता पिता को अपने बच्चों से खुलकर इस बारे में बात करनी चाहिए और उन्हें भी आउटडोर गेमों में उनके साथ शामिल होना चाहिए जिससे वे वीडियो गेम छोड़कर बाहर खुले मैदान में आने के लिए प्रेरित हों।

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