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एंटीबायोटिक्स-वरदान या अभिशाप

एंटीबायोटिक्स-वरदान या अभिशाप

एंटीबायोटिक्स-वरदान या अभिशाप 

एंटीबायोटिक की खोज के पहले लाखों लोग हर वर्ष संक्रमण के कारण मृत्यु की आगोश में समा जाते थे जब पहले एंटीबायोटिक पेनिसिलिन की खोज हुई तो वह चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही। इसकी खोज के बाद हर वर्ष लाखों लोगों की जान बचाना संभव हो पाया परंतु यही एंटीबायोटिक दवाइयां मनुष्य के लिए अभिशाप बनती जा रही हैं।

अफ्रीकी मूल के लोगों का रंग सामान्यता काला व यूरोपीय मूल के लोगों का रंग सामान्यतः गोरा क्यों होता है? वास्तव में यह सारी व्यवस्था प्रकृति के द्वारा की गई है जो हजारों लाखों वर्षों में डीएनए(जींस) में आने वाले परिवर्तनों के कारण हुए हैं जो उस विशेष क्षेत्र के रहने के लिए उन्हें अनुकूल बनाते हैं।

कुछ ऐसी ही व्यवस्था जीवाणुओं (बैक्टीरिया) के साथ भी है। जब हमारे शरीर में बैक्टीरिया के कारण कोई बीमारी होती है तो एंटीबायोटिक दवाइयों के सेवन से वह सब मर जाते हैं। जब इस बैक्टीरिया की हजारों पीढ़ियां उसी एंटीबायोटिक के कारण मरती रहती हैं तो धीरे-धीरे उनमें वह परिवर्तन आते जाते हैं जो उन्हें उस एंटीबायोटिक से मरने की दर को कम करते हैं। कुछ और पीढ़ियों के बाद वह दवा उन पर असर करना बंद कर देती है।

यदि भविष्य में यह बैक्टीरिया अपना रूप बदलकर या इनकी कोई नई प्रजाति प्रजाति हमें संक्रमित करेगी तो अभी तक की उपलब्ध एंटीबायोटिक दवाइयां उन पर असर नहीं करेंगे और संक्रमण के गंभीर होने की संभावना बनी रहेगी।

इसे हम TB बीमारी के उदाहरण से समझ सकते हैं। सामान्यतः टीवी बीमारी का इलाज 6 महीने में हो सकता है, यदि दवाइयों का नियमित तौर पर सेवन किया जाए। परंतु यदि किसी किसी दिन दवाइयां छोड़ दी जाए अर्थात मरीज को दी जाने वाली खुराक अनियमित हो जाए तो यही सामान्य TB Drug-Resistant TB में परिवर्तित हो जाता है जिसके इलाज में 3 वर्ष या उससे अधिक का समय लग सकता है तथा यह बहुत ही जटिल हो जाएगा।

इसे एक दूसरे उदाहरण से समझ सकते हैं। जब हमें घर में मच्छर काटते हैं, तब हम विभिन्न प्रकार के वेपराइजर(All-out) आदि का इस्तेमाल करते हैं। इस दौरान हम देखते हैं कि लगभग सभी मच्छर भाग जाते हैं या बेहोश होकर गिर जाते हैं परंतु कुछ मच्छर जिनकी संख्या एक या दो हो सकती है यह बेहोश नहीं होते तथा वहीं आसपास मंडराते रहते हैं। वास्तव में यह मच्छर उस पीढ़ी से आया है जिसने उस वेपराइजर के प्रति स्वयं को Resist करना प्रारंभ कर दिया है। इस मच्छर की आगामी पीढ़ियां धीरे धीरे इस प्रकार परिवर्तित होती चली जाएंगी जिनके ऊपर इन वेपराइजर का प्रयोग करना व्यर्थ हो जाएगा।

वर्तमान में उपलब्ध सबसे नए अच्छे एंटीबायोटिक की खोज भी 50+ वर्ष पहले की गई थी। इन दवाओं के बहुत अधिक प्रयोग करने से सभी बैक्टीरिया इन दवाओं के अभ्यस्त होते चले जा रहे हैं जिस कारण निरंतर Drug Resistance की स्थिति उत्पन्न होती जा रही है।

समाधान

इसके दो मुख्य समाधान हैं-

एंटीबायोटिक्स का सावधानीपूर्वक प्रयोग

एंटीबायोटिक्स का प्रयोग बहुत सीमित मात्रा में, बहुत आवश्यक होने पर व विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। डॉक्टर भी इस बात का ध्यान रखें कि एंटीबायोटिक्स का विवेकानुसार ही बहुत सीमित मात्रा में प्रयोग हो।

नए एंटीबायोटिक्स की खोज

इसके दूसरे समाधान में नए एंटीबायोटिक्स की खोज है। हमें नए एंटीबायोटिक्स खोजने होंगे जिनके प्रति अभी तक के बैक्टीरिया Resistance उत्पन्न ना कर पाए हों। जिससे ये नई एंटीबायोटिक दवाइयां उनके ऊपर बहुत तेजी से असर करके उनको समाप्त कर देंगे।

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