BSNL की बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार है? - Tech and Gyan-इंडिया का श्रेष्ठ हिंदी ब्लॉग-तकनीक और ज्ञान की बातें हिंदी में

Latest

BSNL की बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार है?

bsnl ki badhali

BSNL की बदहाली के लिए कौन जिम्मेदार है?


BSNL अर्थात भारत संचार निगम लिमिटेड (भारत सरकार के स्वामित्व वाली) कंपनी जिसकी स्थापना 1 अक्टूबर 2000 को की गई थी, आज सभी मोबाइल ऑपरेटर के बीच अंतिम पायदान पर खड़ी है और अपने स्टाफ को सैलरी देने के लिए अपनी आय से अधिक सरकार द्वारा बीच-बीच में मिलने वाली सहायता राशि पर निर्भर है।

जब BSNL की स्थापना आज से लगभग 20 वर्ष पहले की गई तो आम भारतीय जनमानस के मन में खुशी की लहर दौड़ गई। ये वो दौर था जब प्राइवेट कंपनियां इनकमिंग कॉल के लिए भी चार्ज वसूलती थीं। BSNL के आने से इस चार्ज की समाप्ति की उम्मीद जगी और बीएसएनएल ने ऐसा किया भी। 
जब प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर विभिन्न प्रकार से लोगों के पैसे अकाउंट में से काट लिया करते थे उस दौर में बीएसएनल ने लोगों को इस तरह की कटौती से निजात दी।
उस दौर में प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर हिडेन चार्जेस के नाम पर कई तरह के चार्ज अपने कस्टमर से वसूलती थीं। जैसे बिना जानकारी के ही प्लान बदल देना, गलत तरीके से रिंग टोंस वॉलपेपर्स आदि के लिए मनमाने चार्ज वसूलना इत्यादि।

बहुत जल्द ही BSNL की पहचान एक भरोसेमंद टेलीकॉम ऑपरेटर के रूप में स्थापित हो गई परंतु जब 2008 में बहुत सारे नए ऑपरेटर का आगमन हुआ तो अपनी आक्रामक मार्केटिंग की रणनीति के तहत उन्होंने लोगों के बीच अपनी जगह स्थापित करनी शुरू कर दी परंतु BSNL वहां पर अपनी रणनीति में कोई विशेष बदलाव ना करते हुए अपने पुराने ढर्रे पर ही चलता रहा।

आज वर्तमान में बहुत सीमित संख्या में मोबाइल ऑपरेटर बचे हैं जिनमें एयरटेल, जिओ, वोडा- आइडिया, बीएसएनल, एमटीएनएल हैं। यहां चुकी एमटीएनएल केवल दिल्ली मुंबई में अपनी सेवाएं देता है अतः उसे छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी टेलीकॉम ऑपरेटर के बीच बीएसएनल की स्थिति सबसे अधिक खराब है।
आज बीएसएनएल की बदहाली के लिए जिम्मेदार प्रमुख कारकों की हम यहां पर चर्चा करेंगे।
बीएसएनएल की बदहाली के लिए प्रमुख कारण निम्नलिखित रहे हैं।

1. BSNL- भाई साहब नहीं लगेगा।

वैसे तो लोकसभा में यह मजाक में कही गई बात लगती है परंतु इसके पीछे कुछ सच्चाई भी है। किसी वजह से नेटवर्क डाउन होने की स्थिति में प्राइवेट ऑपरेटर बहुत जल्दी काम करके उसे ठीक करके पुरानी स्थिति में वापस ले आते हैं परंतु BSNL नेटवर्क खराब होने पर कब तक ठीक होगा यह कहना कठिन है। कई बार मोबाइल फोन के टावर 24 घंटे या उससे अधिक भी बंद रहता है।

2. वेबसाइट और ऐप का खराब यूजर इंटरफेस।

यदि हमें किसी भी प्राइवेट टेलीकम ऑपरेटर के सिम कार्ड के अकाउंट के बारे में जानकारी लेनी हो कैसे की वैलिडिटी डाटा बैलेंस पिछला रिचार्ज इत्यादि तो वह बहुत ही आसानी से ऐप में उपलब्ध हो जाता है। परंतु बीएसएनएल ऐप प्रयोग करते समय इसी तकनीक के प्रयोग करने का एहसास होता है जो 20 वर्ष पहले प्रयोग हुआ करती थी। हमें इस ऐप के माध्यम से किसी भी प्रकार की कोई विशेष जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती है।

3. 4G नेटवर्क का अभाव।

जहां अन्य प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर 5G नेटवर्क लाने की तैयारी करने में लगे हुए हैं वही बीएसएनल अभी तक 2G और 3G नेटवर्क से ही काम चला रहा है। बीएसएनल का 4G नेटवर्क बहुत ही सीमित क्षेत्र में उपलब्ध है।बीएसएनएल की दुविधा भी इस समय यही है कि यदि यह अपने 4G नेटवर्क का विस्तार करता है तो इस प्रक्रिया में 1 से 2 वर्ष लग जाएंगे और तब तक देश में 5G उपलब्ध हो जाएगा। जिस कारण 4G नेटवर्क के लिए किया गया काम व्यर्थ चला जाएगा। वास्तव में जब बोली लगाकर प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर्स को 4G स्पेक्ट्रम दिया गया उस समय यह नियम बनाया गया कि बीएसएनएल को नीलामी प्रक्रिया में भाग लिए बिना स्पेक्ट्रम उस रकम पर दे दिया जाएगा जो उस नीलामी प्रक्रिया में सबसे अधिक रही होगी परंतु बाद में यह मामला कोर्ट में जाने के बाद बीएसएनल को स्पेक्ट्रम देने से इंकार कर दिया गया और वह स्पेक्ट्रम से वंचित हो गया जिस कारण 4G नेटवर्क लॉन्च करने में देरी होती चली गई।

4. आईपीओ (IPO-INITIAL PUBLIC OFFER) को मार्केट में लेकर ना आना।

जिस समय बीएसएनल अपनी बुलंदियों पर था उस समय इक्विटी शेयर मार्केट में अपना आईपीओ लॉन्च करके वह अच्छी खासी रकम जुटा सकता था जिसका प्रयोग वह अपने भविष्य की योजनाओं के विस्तार तथा अपने नेटवर्क के सुधार के लिए कर सकता था परंतु कंपनी कभी भी अपना आईपीओ लेकर नहीं आई जिस कारण उसके पास फंड की कमी बनी रही जिसका खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है।

5. आवश्यकता से अधिक एंप्लाइज का होना।

वर्तमान में VRS देने के बाद बीएसएनल के पास लगभग 80000 एंलाई हैं
 परंतु पहले इनकी संख्या पौने दो लाख के करीब थी। एयरटेल इतनी बड़ी कंपनी होने के बावजूद 70 से 80 हजार एम्पलाई के बलबूते खड़ी थी वही बीएसएनल लगभग इसके दुगने एंप्लाइज को कैरी कर रहा था जिससे उसकी आय का बहुत बड़ा हिस्सा उनको सैलरी देने में चला जाता थ।

6. धीमी प्रक्रिया से डिसीजन लेना।

चुकी बीएसएनल एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है जिस कारण इसके फैसले लेने के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिस कारण नेटवर्क में सुधार से लेकर किसी तरह का कोई परिवर्तन करना हो तो एक बहुत लंबी चेन से फैसले को गुजरना पड़ता है जिस कारण से देर हो जाती है और टेलीकॉम क्षेत्र एक त्वरित परिवर्तन वाला क्षेत्र है इस तरह की देरी भी कंपनी के पिछड़ने के बहुत सारे कारणों में से एक है।

7. गैर-लाभकारी क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं देना।

सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी होने के कारण बीएसएनल का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना ना होकर सभी लोगों तक नेटवर्क पहुंचाना है। इस कारण से उसके ऊपर सदैव सरकार का दबाव रहा है कि वह दूरदराज के उन इलाकों तक भी अपने नेटवर्क का विस्तार करें जहां कई बार यूज़र ना के बराबर होते हैं और वहां से कोई आए नहीं होती बल्कि नुकसान होता है।

8. अपनी मार्केटिंग के लिए गैर मानक तरीकों का प्रयोग करना।

जो लोग बीएसएनल का प्रयोग करते हैं उन्हें अच्छी तरह से इन चीजों का सामना करना पड़ा होगा जिसमें उनके पास एसएमएस आते हैं जिसमें किसी लड़की का नाम लिखा होता है और वह कह रही होती है आज मैं अकेली हूं उससे दोस्ती करोगे अगर हां तो इस नंबर पर कॉल करो। इस तरह की कॉल्स प्रमोशनल कॉल्स हैं जो बीएसएनल को ही लाभ पहुंचाने के लिए हैं। परंतु इन तरीकों से अपनी आय को बढ़ाने की रणनीति बहुत से लोगों को रास नहीं आती और वह बीएसएनएल के लिए अपने मन में नकारात्मक छवि का निर्माण कर लेते हैं और धीरे-धीरे उस नेटवर्क ऑपरेटर से कटने लगते हैं।

9. प्रतिस्पर्धी प्लांस का ना होना।

पिछले कुछ समय से बीएसएनल के प्लांस अन्य टेलीकॉम ऑपरेटर्स के तुलना में प्रतिस्पर्धी हैं परंतु पूर्व में यह स्थिति नहीं थी उदाहरण के लिए जहां अन्य कंपनियां वैलिडिटी एक्सटेंशन के लिए कोई चार्ज नहीं करती थी वही बीएसएनल वैलिडिटी के लिए भी अलग से रिचार्ज करवाती थी जो इसके प्लांस को गैर प्रतिस्पर्धी बना देता था।

10. एंप्लाइज में जुझारूपन का अभाव।

बीएसएनल के स्टाफ वर्तमान में भले ही पूर्व की तुलना में अधिक मेहनत करते हो परंतु पहले यह स्थिति नहीं थी। स्टाफ में जुझारूपन की घोर कमी थी अधिकतर एम्पलाई मैं डेडीकेशन का अभाव था। बीएसएनल के कनेक्शन के लिए कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था और आसानी से कनेक्शन आम आदमी को उपलब्ध नहीं हो पाता था आज भले ही परिस्थितियां बदल गई हो परंतु पूर्व में जिन लोगों का सामना उनसे हुआ होगा उन्हें इस बात का एहसास अच्छी तरह से होगा।

जहां जिन कारणों की चर्चा की गई है यह लेखक के अपने विचार हैं हो सकता है आप इससे सहमत ना हो या आपके पास कुछ अन्य विचार भी हों। इसके लिए यही कहा जा सकता है कि विचार अनंत हैं इनको सीमाओं में बांधना असंभव है और यह मुक्त हैं यह हर जगह मौजूद हैं आपके मन में मेरे मन में और सबके मन में।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें