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मोटिवेशनल कंटेंट की मायावी दुनिया।


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मोटिवेशनल कंटेंट की मायावी दुनिया।

मोटिवेशनल कंटेंट हमारी किसी समस्या का समाधान करते हैं या वो खुद ही एक समस्या  हैं। आखिर मोटिवेशनल वीडियोस हमें इतना आकर्षित क्यों करते हैं। इसका असर कितनी देर तक रहता है?

मनुष्य होना कितना दुर्लभ है?


मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। इसका निर्माण प्रकृति ने इस तरह से किया है कि यह अकेला नहीं रह सकता। इसे समूह में रहना पड़ता है और यह समूह में रहकर एक दूसरे को देख कर बहुत सारी चीजों को सीखता है। बहुत सारे जानवर भी समूह में रहते हैं परंतु मनुष्य उनसे बहुत भिन्न है। 

हिंदू माइथोलॉजी में तो कहा जाता है की 84 लाख योनियों में जन्म लेने के बाद मनुष्य जन्म मिलता है। आप कल्पना कर सकते हैं कि प्रायिकता के आधार पर मनुष्य के रूप में जन्म लेना कितना दुर्लभ है। 

प्रतिस्पर्धा की वर्तमान स्थिति।


प्राचीन काल में इस धरती पर मनुष्यों की संख्या सीमित थी। बहुत थोड़े से मनुष्य इतनी विशाल धरती के ऊपर रहते थे और उनकी सभी आवश्यकताएं पूरी हो जाया करती थी। परंतु वर्तमान समय में इस धरती पर मनुष्ययों की आबादी लगभग 800 करोड़ की हो चुकी है। इसके अतिरिक्त मनुष्यों ने अपनी जीवन चर्या को इस तरह से बनाया है कि उसे शारीरिक श्रम कम करना पड़ता है और मानसिक श्रम अधिक करना पड़ता है। इस कारण से मनुष्यों के बीच में प्रतिस्पर्धा शारीरिक स्तर पर न होकर मानसिक स्तर पर हो गई है। वर्तमान समय में मनुष्यों की संख्या अधिक जबकि संसाधन सीमित होने के कारण प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा असीमित होती चली जा रही है। आज स्कूलों में जो हम अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं उसके बारे में यह कहना बहुत कठिन है कि आने वाले समय में वह पढ़ाई उसके रोजगार के लिए कितनी काम आएगी। 


वस्तुओं का निर्माण इस प्रकार से किया जा रहा है कि वह न्यूनतम मानव श्रम का प्रयोग करके अपने उद्देश्य को पूरा करें। निरंतर फैक्ट्रियों में, कंपनियों में ऑटोमेशन तकनीक का प्रयोग करके कर्मचारियों की संख्या को कम किया जा रहा है। परिवार एकल होते चले जा रहे हैं। तकनीक के प्रयोग के कारण लोग एक दूसरे से प्रत्यक्ष तौर पर कम बातचीत करते हैं और वर्चुअल दुनिया में अर्थात सोशल मीडिया में अधिक एक्टिव रहते हैं।

मोटिवेशन की आवश्यकता।


इन सब कारणों की वजह से मनुष्यों का एक बहुत बड़ा वर्ग दुखी है कई बार यह दुख डिप्रेशन की स्थिति तक भी चला जाता है। इस दुख को कम करने के लिए इंटरनेट की दुनिया में उसके लिए हजारों लाखों की संख्या में मोटिवेशनल कंटेंट लिखित रूप में अथवा वीडियो के रूप में उपलब्ध हैं जो उसे बताते हैं कि इस वीडियो में दी गई बातों को अपनाने पर वह अवश्य सफल होगा। सफलता निश्चित मिलेगी या इस तरह की कोई और बात।

मोटिवेशनल कंटेंट- समस्या और समाधान।


सफलता प्राप्त करने का उत्सुक व्यक्ति मोटिवेशनल वीडियो देखना प्रारंभ करता है। पहले एक वीडियो फिर दूसरा फिर तीसरा और वह देखता ही चला जाता है। कभी वह एक क्रिएटर का कंटेंट दिखता है तो कभी दूसरे का तो कभी तीसरे का हर तरफ बस मोटिवेशन ही मोटिवेशन। ऐसा लगता है कि अब तो मैं पूरी दुनिया बदल दूंगा। मैं आज से ही बदल जाऊंगा, मैं सुबह 4:00 बजे उठूंगा, सिर्फ 4 घंटे सोऊंगा, फोकस्ड रहूंगा और इस वीडियो में कही गई एक एक बात बात को अपनाकर जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करूंगा।


फिर वह यहीं पर नहीं रुकता वह वीडियो देखता ही रहता है और मोटिवेशन का भ्रम प्राप्त करता रहता है और फिर एक चक्र प्रारंभ हो जाता है। वह प्रातः काल उठता है, मोटिवेशनल वीडियो देखता है कुछ घंटे बीतते हैं, वह फिर मोटिवेशनल वीडियो देखता है, फिर कुछ घंटे बाद मोटिवेशनल वीडियो देखता है और यह प्रक्रिया हफ्तों महीनों और कभी-कभी सालों तक चलती रहती है और फिर सोचता है कि वह सफल क्यों नहीं हो रहा है। इतने मोटिवेशनल वीडियो देखने के बाद भी सफलता क्यों नहीं मिल रही है?


समस्या यह है कि हम मोटिवेशन वीडियो को उस दवा की तरह समझते हैं जिसे खाकर बुखार से पीड़ित व्यक्ति अपने बुखार को समाप्त कर लेता है। मोटिवेशनल वीडियो कोई गोली नहीं है जिसे पानी के साथ निगल लिया जाए और समस्या खत्म हो जाएगी तो यह क्या है?


वास्तव में यह विचार है जो कुछ समय के लिए हमारे शरीर में डोपामिन रसायन का स्राव करते हैं और हमें अच्छा महसूस होता है। हमारी सफलता या असफलता से इसका कोई विशेष लेना देना नहीं है यदि हम असफल है तो इसकी समस्या कहीं और है और इसका समाधान हम जिस क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं उस क्षेत्र में अपने ज्ञान को बढ़ाकर उसे अमल में लाने में है।


परंतु आज का मनुष्य ज्ञान की तरफ कम जाता है और वह ऐसे मोटिवेशनल वीडियो की तरफ अधिक आकर्षित होता है जो यह दावा करते हैं कि इस वीडियो में अपनाई गई इस एक बात से आपका जीवन बदल जाएगा आप वह हो जाएंगे जो आप होना चाहते हैं।


यदि मनुष्य सीखना बंद कर देता है तो वह उस तालाब की तरह हो जाता है जिसका पानी एक ही जगह पड़ा पड़ा सड़ता रहता है जरूरत है उसे उस नदी की तरह बनने की जिसका पानी निरंतर बहता रहता है और वह अपनी ताजगी को कायम रखता है।

मोटिवेशनल कंटेंट का महत्व।


मोटिवेशनल वीडियोज की महत्ता को मैं कम करने का प्रयास नहीं कर रहा हूं परंतु मैं आपको यह कहना चाहता हूं कि आप को इस के लूप अर्थात चक्र में फंसने की जरूरत नहीं है अन्यथा आप इसमें उलझ जाएंगे और यह दौड़ चलती रहेगी जो कभी खत्म नहीं होगी।


मोटिवेशनल वीडियो हमारे जीवन में खाने में नमक की तरह का किरदार निभाते हैं ना कि हमारे भोजन का किरदार।मोटिवेशनल वीडियोस को भोजन की तरह हर समय खाने की आदत बंद करने में ही भलाई है।


अपना सारा समय इन वीडियो को देखने की बजाएं उन तरीकों को सीखने में खर्च करें जो आपके कार्यक्षेत्र में आप को परफेक्ट बनाने की तरफ ले करके जाएं। नित नई आने वाली टेक्नोलॉजी से अपने आप को अपडेट करते रहें। कुछ भी नया सीखने से पीछे ना हटें और हर आने वाली समस्या को सीखने के अवसर के रूप में देखें।

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