इंफॉर्मेशन का समुद्र हम सब को डुबो सकता है! - Tech and Gyan-इंडिया का श्रेष्ठ हिंदी ब्लॉग- Technology (तकनीक) और ज्ञान की बातें हिंदी में

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इंफॉर्मेशन का समुद्र हम सब को डुबो सकता है!

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इंफॉर्मेशन का समुद्र

इस दुनिया में 2 बिलियन अर्थात दो अरब से ज्यादा वेबसाइट्स हैं और यह संख्या हर सेकंड बढ़ती रहती है। यूट्यूब पर हर सेकंड में इतना वीडियो अपलोड कर दिया जाता है यदि हम उस एक सेकंड के वीडियो को देखने लगेंगे तो हमें कई साल लग जाएंगे और कुछ मिनट में अपलोड किए हुए सभी वीडियो को तो हम अपने पूरे जीवन में भी नहीं देख पाएंगे।

यह बस एक तस्वीर है इंटरनेट पर उपलब्ध डाटा की। यह डाटा की दुनिया इतनी बड़ी हो चुकी है कि इसके सामने समंदर भी छोटा पड़ जाएगा। हर दिन लाखों की संख्या में आर्टिकल्स लिखे जाते हैं करोड़ों की संख्या में न्यूज़ पब्लिश की जाती हैं। और हम अपने हाथ में छोटे से मोबाइल फोन का प्रयोग करके उस पूरे समंदर को एक्सेस कर पाते हैं।

यदि हम ताजा खबरें पढ़ते हैं तो वह कुछ मिनट तक ही रुक पाते हैं और अगले कुछ मिनट में ही सैकड़ों और खबरें तैयार हो जाती हैं। हम अपने आप को कितना ही अपडेट रखने का प्रयास कर लें यदि हम हर घंटे मोबाइल फोन खोल कर ना देखें तो कुछ घंटों में हमें ऐसा लगेगा कि हम पिछड़ गए! हमें तो यह भी नहीं पता! सारी दुनिया को खबर लग गई! पर यह प्रवृत्ति घातक है। स्वयं को अपडेट रखना बहुत जरूरी है पर इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि हम दुनिया में 800 करोड़ लोगों की खबरें रखें, 200 से ज्यादा देशों की जानकारी रखें।

हम मनुष्य हैं हम जिज्ञासु हैं और यही जिज्ञासु होने की प्रवृत्ति हमें सभी जानवरों से अलग बना देती है यह प्रवृत्ति जानवरों की तुलना में अपने उन्नत रूप में सभी मनुष्य में पाई जाती है। बचपन से सीखने की प्रवृत्ति, देखकर - जन्म लेती है और जीवन पर्यंत चलती रहती है।

पहले इंटरनेट या सोशल मीडिया नहीं था। हम खबरों के लिए समाचार पत्र अथवा टेलीविजन पर निर्भर रहते थे, जो सीमित संख्या में खबरें पहुंचाते थे और हम स्वयं को उनसे अपडेट रखते थे। परंतु वर्तमान में इंटरनेट और सोशल मीडिया के समय में पलक झपकते ही कोई न्यूज़ पूरी दुनिया में पहुंच जाती है। यह बहुत अच्छा है, चमत्कारी है परंतु इसके कुछ दुष्परिणाम भी हैं।

अनजाने में ही हम इतना डाटा अपने दिमाग में स्टोर करने लगते हैं की चीजों को बहुत ज्यादा एनालिसिस करने की प्रवृत्ति हमारे अंदर पनपने लगती है। इससे हमारी निर्णय लेने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। हर तरफ इंफॉर्मेशन है बाढ़ आई हुई है। हम सुबह उठने से लेकर रात के सोने तक इस में डूबे रहते हैं।
पर क्या ऐसा करना जरूरी है?

कहा जाता है कि आज के समय में जिसके पास सूचना है उसके पास पावर है पर यह जानना बहुत जरूरी है यह कौन सी सूचना है जो उसे पावर प्रदान कर सकती है। क्या सभी तरह की सूचना से अपडेट रहना हमें मजबूत बनाता है? बिल्कुल नहीं, सर्वप्रथम हमें यह स्वीकार करना होगा कि सभी सूचना को अपने दिमाग में डालने की जरूरत नहीं है। हमें उसमें से अपने काम की चीज का चयन करना सीखना होगा। कुछ हद तक हम सर्च इंजन का प्रयोग करके ऐसा करते भी हैं पर यहां पर मैं कुछ उपायों के बारे में आपको बताऊंगा  जिनका प्रयोग करके इस सूचना की बाढ़ में डूबने से बचा जा सकता है।

1. इंटरनेट पर खर्च किए जाने वाले समय की सीमा तय करें।

दिन के 24 घंटों में से कितने घंटे आपको इंटरनेट पर खर्च करने हैं इसकी सीमा का निर्धारण अवश्य करें। यदि यह सीमा निर्धारित नहीं होगी तो हो सकता है आप रोज के 8, 10, 12 या शायद 15 घंटे इंटरनेट पर खर्च कर रहे हों और जिसका कोई उद्देश्य ना हो।

2. ऑनलाइन जाने से पूर्व ही निर्धारित करें कि क्या करने जा रहे हैं? 

अक्सर हम इंटरनेट पर आते किसी काम से हैं और उद्देश्य भटक कर कोई दूसरा काम करना शुरू कर देते हैं और फिर कोई तीसरा। यह चक्र चलता रहता है और बहुत सारे घंटे निरुदेश्य ही बर्बाद हो जाते हैं। उदाहरण के लिए आपको अपनी ईमेल चेक करनी है तो कोशिश करें की इमेल चेक करने के बाद इंटरनेट को बंद कर दें।

3. गूगल की गूगल अलर्ट्स सर्विस का प्रयोग करें।

 इसमें जो आपको जानकारी चाहिए उनके कीवर्ड का निर्धारण करके गूगल अलर्ट्स की सेटिंग कर दें। इसके बाद गूगल आपके द्वारा निर्धारित कीवर्ड्स पर आधारित दुनिया भर की जानकारी को आपके द्वारा निर्धारित फ्रीक्वेंसी दैनिक, साप्ताहिक रूप से आपके ईमेल पर डिलीवर कर देगा। ऐसा करके आप लाखों-करोड़ों न्यूज़ में से फिल्टर कर सकेंगे।


4. सार सार के  धरि रहे थोथा देई उड़ाय।

यदि हम सिर्फ हिंदी न्यूज़ चैनल्स की बात करें तो इनकी संख्या 100 से ऊपर है। इसी प्रकार अन्य भाषाओं के लिए भी अपने न्यूज़ चैनल हैं। इस भीड़ में से दो या तीन न्यूज़ चैनल का ही प्रयोग करें अन्यथा आपका समय न्यूज़ देखने में नहीं चैनल चेंज करने में ही खत्म हो जाएगा।

5. जहां तक संभव हो बेस्ट का चयन करें।

 हर रोज सैकड़ों हजारों घंटों की वेब सीरीज, मूवी आदि बनती रहती हैं। उन्हें देखने की जल्दी ना करें। उनकी रेटिंग व रिव्यू अच्छे हो तो ही देखें।

6. 1 घंटे का काम आधे घंटे में करें।

यूट्यूब की वीडियो में उसकी स्पीड बढ़ा कर समय बचाएं। ऐसा आप वीडियो चलने के दौरान थ्री डॉट्स पर क्लिक करके वीडियो स्पीड का चयन करके कर सकते हैं।

7. लिखित सामग्री वीडियो से बेहतर हो सकती है।

लिखित सामग्री में आप वीडियो की तुलना में कहीं जल्दी अपने काम की चीज को ढूंढ सकते हैं और पढ़ सकते हैं अतः अपने ज्ञान के लिए लिखित सामग्री को भी पर्याप्त महत्व दें।

8. न्यूज़, न्यूज़ ही होनी चाहिए।

जिन खबरों का प्रभाव आपके जीवन पर अधिक मात्रा में पड सकता है केवल उन्हीं पर ध्यान लगाएं। किसी की भैंस घर से भाग गई जैसी खबरों पर समय नष्ट ना करें।

9. सेंसेशनल सदैव अच्छा नहीं होता।

मैं हिंदी भाषा का विरोधी नहीं हूं बल्कि यह आर्टिकल भी मैं हिंदी में ही लिख रहा हूं परंतु यहां पर मैं हिंदी न्यूज़ चैनलों की एक कमी की ओर इशारा करना चाहूंगा। हिंदी न्यूज़ चैनल एक ही खबर को जैसे कल्पना कीजिए किसी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी ने चोरी की तो यह जानकारी 1 से 2 मिनट में दी जा सकती है परंतु उनका अंदाज किस तरह होगा मैं उसका एक उदाहरण प्रस्तुत करता हूं

"गौर से देखिए इस आदमी को यही है वह आदमी जिसके मासूम चेहरे को देखकर आपको इसका एहसास भी नहीं होगा जो गुनाह इसने किया है।आज हम आपको इसकी सच्चाई बताएंगे, आज इसकी सच्चाई जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। आज आपको इसकी सच्चाई जानकर अपने पड़ोसियों पर यकीन नहीं होगा, आप उन पर शक करने लगेंगे - ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला" आप आधे घंटे इस न्यूज़ को देखकर केवल यह जान पाएंगे कि इस कर्मचारी ने अपनी कंपनी जिसमें वह काम करता था चोरी की। 1 मिनट की बात को बताने के लिए यह न्यूज़ चैनल्स आपका आधा से एक घंटा खा जाएंगे ऐसे न्यूज़ चैनल से दूर रहें जो खबरों को सेंसेशनल बनाने के चक्कर में समय बर्बाद करने में एक्सपर्ट हैं।

10. राय साहब ना बने।

हर विषय पर अपनी राय देने के लिए स्वयं को प्रत्येक मुद्दे पर एक्सपर्ट बनाने की प्रवृत्ति का परित्याग करें। आप जिस भी क्षेत्र में है उसमे स्वयं को एक्सपर्ट बनाने की प्रवृत्ति अवश्य रखें परंतु हर विषय में घुसकर जिसका आप के जीवन से कोई लेना देना नहीं है अपने आपको एक्सपर्ट बनाकर कुछ विशेष हासिल नहीं होगा।

टेक्नोलॉजी का आविष्कार आपके हमारे सहयोग के लिए हुआ है। हमें इसका गुलाम नहीं बनना चाहिए और अपने जीवन को जिंदादिली के साथ खुशी खुशी भरपूर तरीके से अपने परिवार तथा दोस्तों के साथ (वास्तविक दुनिया में ना कि वर्चुअल दुनिया में) समय खर्च करके जीना चाहिए।

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