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भारत में 59 चाइनीज एप्स बैन किए जाने के मायने।

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भारत में 59 चाइनीज एप्स बैन किए जाने के मायने।

भारत सरकार ने 29 जून 2020 (दिन सोमवार) को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT ACT) की धारा 69A के तहत अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए 59 चाइनीज ऐप्स को भारत में बैन कर दिया है। इस बैन के तकनीकी पहलू और इसके सकारात्मक पक्षों कि आज हम यहां पर चर्चा करेंगे।

बैन किए जाने का कारण

भारत सरकार ने जिस कानून के तहत इन एप्स को बंद किया है उस कानून की उस धारा का प्रयोग किया है जिसमें देश के लोगों की गोपनीयता की सुरक्षा को खतरा बताया गया है। इससे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को भी खतरा उत्पन्न होने की संभावना है।

चाइनीस एप्स पर लगातार उपभोक्ताओं की जासूसी करने के आरोप लगते रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए टिक टॉक एप पर पहले कुछ समय के लिए बैन लगाया गया था परंतु बाद में इस बैन को हटा लिया गया था। चीन की दो कंपनियों ZTE और HUAWEI की टेलीकॉम OEM (original equipment manufacturering) जगत में 40% की हिस्सेदारी हो गई है। भारत सहित दुनिया भर में इन कंपनियों पर लगातार अपने इक्विपमेंट्स के माध्यम से जासूसी करने के आरोप लगते रहे हैं। Huawei कंपनी को दुनिया के कई देशों में पहले ही बैन किया जा चुका है। ठीक इसी प्रकार के आरोप बहुत सारे चाइनीस ऐप्स पर भी लगते रहे हैं जिनमें प्रमुख हैं टिक टॉक ( जिसके अकेले भारत में 10 करोड़ यूजर हैं) यूसी ब्राउजर, शेयर इट, हेलो, लाइकी इत्यादि।

एप्स हमारी जासूसी कैसे करते हैं?


जब भी हम किसी ऐप को अपने एंड्राइड प्ले स्टोर से अथवा एप्पल के आईओएस स्टोर से डाउनलोड करते हैं और फिर जब हम उसे इंस्टॉल करते हैं तो वह हमसे कुछ विशेष अनुमति मांगता है। हम उसे वह अनुमति प्रदान कर देते हैं और फिर ऐप को इंस्टॉल कर लेते हैं। इन अनुमति को मांगने के दौरान यह ऐप हमसे उस चीज के लिए भी अनुमति मांगते हैं जिसकी उन्हें अपने कार्य को अच्छे से संपादित करने के लिए कोई आवश्यकता नहीं है इसे हम एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं।

कल्पना कीजिए कोई ऐप हमने अपनी वॉइस को रिकॉर्ड करने के लिए डाउनलोड करके इंस्टॉल की तो वह ऐप हमसे माइक्रोफोन को ऑन करने की अनुमति मांगेगा ताकि उस से आने वाली आवाज को रिकॉर्ड कर सके साथ ही वह किसी फाइल को सेव करने की अनुमति मांगेगा ताकि वह रिकॉर्डेड आवाज को स्टोर कर सके। इसके साथ ही वह रिकॉर्डिंग की हुई फाइलों को प्ले करने की अनुमति मांगेगा ताकि हम रिकॉर्ड फाइलों को सुन सके। यह अनुमति हम उस ऐप को प्रदान कर देते हैं। पर यही ऐप हमसे कैमरा एक्सेस करने की अनुमति भी मांग लेता है जिसकी वॉइस रिकॉर्डिंग में कोई आवश्यकता नहीं है। जिसके बाद यह ऐप हमें बिना बताए हमारे कैमरे को (यह केवल एक उदाहरण है फोन का कोई अन्य भाग भी हो सकता है) एक्सेस करना प्रारंभ कर देते हैं और जब हमारा फोन किसी भी स्थिति में रखा हो तो हो सकता है यह ऐप हमारे फोन का कैमरा ऑन कर दे और उस से आने वाली वीडियो फुटेज को किसी अन्य देश के सर्वर पर भेज दे। यह प्रक्रिया फोन के अंदर गुप्त रूप से होगी और हमें इसकी कोई जानकारी नहीं हो पाएगी। यह कैमरे के माध्यम से जासूसी करने का केवल एक उदाहरण है इस तरह के बहुत सारे कार्य हमारे डाटा के साथ किए जा सकते हैं।

यह बिल्कुल आवश्यक नहीं है कि जिस चीज की अनुमति मांगी गई है केवल वही प्रक्रिया संपन्न होगी हां यह बात ठीक है के एंड्रॉयड की पॉलिसी के तहत उन्हें हर चीज को एक्सेस करने के लिए यूज़र से अनुमति लेनी होगी परंतु ये ऐप इस नियम का उल्लंघन अक्सर करते हैं।

इंटरनेट को लेकर चीन की नीति।


इंटरनेट को लेकर चीन की नीति इस प्रकार की रही है कि आज भी यूट्यूब, गूगल, व्हाट्सएप आदि चीन में बैन हैं। चीन ने अपने देश के इंटरनेट को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में लिया हुआ है। चीन से बाहर जाने वाले या आने वाले किसी भी डाटा पर चीन की सरकार की लगातार निगाह रहती है और वह पूरी तरह अपने पक्ष में जाने वाले डाटा को ही अपने देश से बाहर जाने या आने की अनुमति देता है। चीन ने सभी पॉपुलर एप्स या वेबसाइट्स का अपना चीनी वर्जन तैयार किया हुआ है। उदाहरण के लिए गूगल सर्च इंजन की जगह पर चीन अपने सर्च इंजन Baidu का इस्तेमाल करता है।

इन एप्स को ब्लॉक करने की प्रक्रिया।


इन एप्स का मुख्य सर्वर भले ही चीन में स्थित हो परंतु यह अपनी सर्विसेज उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए हमारे ही देश के टेलीकॉम नेटवर्क जैसे एयरटेल, आइडिया-वोडा, जिओ, बीएसएनएल आदि का इस्तेमाल करते हैं तो इन एप्स के अंदर आने वाला तथा जाने वाला डाटा हमारे ही देश के सर्वर से होकर के गुजरता है। तो इन टेलीकॉम कंपनियों के माध्यम से इनमें से वह ऐप जिनको प्रयोग के लिए लगातार इंटरनेट की आवश्यकता होती है तुरंत ब्लॉक किया जा सकता है।

परंतु जिन एप्स का प्रयोग करने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती अर्थात जिनका प्रयोग ऑफलाइन नेटवर्क में भी किया जा सकता है जैसे कैमस्कैनर ये ऐप काम करते रहेंगे तथा इन को ब्लॉक करना कठिन होगा। साथ ही प्ले स्टोर पर तथा आईएएस स्टोर पर ये 59 एप्स भारत देश में डाउनलोड करने के लिए आगे से अनुपलब्ध रहेंगे।

यह भारत सरकार द्वारा उठाया गया बहुत अच्छा कदम है। किसी भी देश के लिए उसकी सुरक्षा, संप्रभुता, एकता और अखंडता सर्वोपरि है। हमारे देश की संस्कृति "वसुधैव कुटुंबकम" वाली रही है परंतु वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए चीन के साथ यह नीति काम नहीं कर सकती।
भारत में हजारों की संख्या में ऐसे लोग हैं जिनकी आय का मुख्य स्रोत टिक टॉक या इस तरह की वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म है जिन का स्रोत चीन है। इन लोगों के लिए समस्या खड़ी हो जाएगी साथ ही इनमें से कई एप्स ऐसी हैं जिनके ऑफिस भारत में है उनके कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। परंतु यह एक बहुत छोटी सी कीमत है जिसे चुकाना आवश्यक है।

इन चाइनीस एप्स को बैन किए जाने से हमारे देश के बहुत सारे युवाओं को कुछ क्वालिटी टाइम खर्च करने का मौका मिलेगा जो अपना बहुत सारा समय टिक टॉक, हेलो, लाइकी, विगो वीडियो आदि पर बर्बाद कर रहे थे जो उन्हें कुछ सिखाते तो नहीं है परंतु उसके बदले में बहुत बड़ी फीस पैसे के रूप में ना सही तो उन सैकड़ों हजारों घंटों के रूप में ले लेते हैं जिन घंटों के लिए कहा जाता है कि समय ही धन है।

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