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क्या टेलीकॉम कंपनियों के समाप्त होने के लिए केवल जियो जिम्मेदार है?

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क्या टेलीकॉम कंपनियों के समाप्त होने के लिए केवल जियो जिम्मेदार है? 


आज से कुछ साल पहले तक हमारे देश में बहुत सारी टेलीकॉम कंपनियां थी जैसे टाटा इंडिकॉम, रिलायंस (अनिल धीरूभाई अम्बानी ग्रुप -ADAG), एयरसेल , यूनिनॉर , टाटा डोकोमो इत्यादि। परंतु वर्तमान में प्राइवेट कंपनियों में केवल तीन टेलीकॉम ऑपरेटर हैं जबकि सरकारी में केवल एक(BSNL+MTNL combined entity) टेलीकॉम ऑपरेटर है। क्या इस स्थिति के लिए केवल जिओ टेलीकॉम ऑपरेटर जिम्मेदार है या कुछ और भी कारण हैं आज हम इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

मैं यहां पर उन पांच कारणों की चर्चा करूंगा जिसकी वजह से ऐसा हुआ।

1. तकनीक के परिवर्तन को धीमा रखना


पुराने सभी मोबाइल ऑपरेटर ने वक्त के साथ स्वयं को परिवर्तित करने में बहुत धीमी प्रक्रिया का पालन किया जिस कारण टेलीकॉम ऑपरेटर्स और मोबाइल टेक्नोलॉजी के बीच एक गैप बनता गया। इस गैप को भरने के लिए जिओ ने कई साल तक तैयारी की और फिर ऐसा नेटवर्क लोगों को उपलब्ध कराया जो सौ फ़ीसदी 4G नेटवर्क है।

2. बजट का निर्धारण करने में दूरदर्शिता का अभाव


टेलीकॉम कंपनियों का फ्यूल फ्रिकवेंसी का स्पेक्ट्रम होता है यह जितना अधिक महंगा होगा टेलीकॉम कंपनियों का खर्च बढ़ता चला जाएगा। टेलीकम कंपनियां, स्पेक्ट्रम, सरकार द्वारा की गई नीलामी में हासिल करती हैं। यह नीलामी की रकम कंपनियां यह सोचकर तय करती हैं कि अगले कितने सालों में इस रकम की भरपाई हो सकती है परंतु यह कंपनियां इस चीज में नाकाम रहीं। इन्होंने तकनीक के परिवर्तन के समय को मापने में चूक की और यह बहुत तेजी से परिवर्तित हुआ। इन्होंने तकनीक के परिवर्तन के समय को वास्तविकता से अधिका आंका और नीलामी की रकम को बहुत अधिक बढ़ा दिया जिस कारण इनको नीलामी में बहुत ज्यादा रकम चुकानी पड़ी जिस कारण इनके पास सदैव पैसे की तंगी बनी रही और यही तंगी इन कंपनियों को भयंकर कर्जे में डूबा के ले आई और आज के समय में भारतीय बैंकों का बहुत बड़ा पैसा एनपीए (Non Performing Asset) के रूप में जाने की आशंका बनी हुई है।

3. ग्राहकों को उपलब्ध सर्विस में पारदर्शिता का अभाव


कुछ ही साल पहले की बात है जब भी आपको मोबाइल रिचार्ज कराना होता था तो इतने सारे प्लान उपलब्ध होते थे कि कौन सा प्लान हमारे लिए उपयुक्त है यह तय करना बहुत मुश्किल होता था। इन प्लानों की संख्या प्रत्येक ऑपरेटर के लिए, प्रत्येक सर्किल के लिए गिना जाए तो हजारों में थी।

इसके अन्य उदाहरण में कई बार ऐसा होता था कि इंटरनेट चलाने के दौरान आपका डाटा पैक खत्म हो जाता था और आपके मूल बैलेंस में से सारे पैसे काट लिए जाते थे इस तरह की घटनाएं इन टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए आम थीं।

यह कंपनियां कई बार विशेष लोगों को विशेष स्कीम उपलब्ध कराती थीं जो टेंपरेरी तौर पर होती थी और यह स्कीम सभी के लिए नहीं होती थी जिस कारण कई बार जो लोग इस से वंचित रह जाते थे वह अपने आपको ठगा हुआ महसूस करते थे।

4. सरकार द्वारा अधिक टैक्स का वसूल किया जाना।


एक कहावत के अनुसार सरकार को अपना टैक्स इस तरह से वसूल करना चाहिए जैसे समुद्र में से कुछ बूंदे निकाल ली जाए तो समुद्र को इस बात का पता भी नहीं चलता। परंतु टेलीकॉम क्षेत्र में बहुत अधिक टैक्स लिया गया जो कुल रेवेन्यू पर आधारित था ना की कंपनियों के होने वाले लाभ पर। इस क्षेत्र को भी अन्य क्षेत्रों की तरह डील किया गया परंतु वास्तव में टेलीकॉम बिजनेस ऐसा बिजनेस है जिसमें तकनीक बहुत तेजी से परिवर्तित होता है इसीलिए कंपनियों को हर समय बहुत अधिक कैश की आवश्यकता होती है। इसका नेटवर्क लगातार अपडेट होता रहता है। परंतु अधिक टैक्स वसूली के कारण यह कंपनियां बहुत अधिक कैश कभी नहीं बन पाई और तकनीकी परिवर्तन में पिछड़ गई।


5. भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री का खुद का इको सिस्टम डिवेलप न कर पाना


संभवत यह सभी कारणों की तुलना में सबसे महत्वपूर्ण कारण है। जिस तरह से भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग ने पिछले कुछ सालों में बहुत अधिक विकास किया है परंतु इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने उस का दसवां हिस्स भी हासिल नहीं किया। हम इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में प्रयोग होने वाले सभी कल पुर्जो के लिए चीन पर निर्भर है जिस कारण यहां की कंपनियों में इन्नोवेशन का बहुत अभाव है। हम टेलीकॉम क्षेत्र में प्रयोग होने वाले इक्विपमेंट्स के लिए पूरी तरह अन्य देशों पर निर्भर हैं। अतः तकनीक के विकास के लिए हमें तब तक रुकना पड़ता है जब तक अन्य देश उस तकनीक का विकास उस स्थिति तक नहीं कर लेते जब तक वह सबके लिए बहुत सस्ते में बहुत आसानी से उपलब्ध हो सके। इसका एक उदाहरण है xiaomi कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए मोबाइल फोन जोकि बहुत कम कीमत में लोगों को 4G फोन उपलब्ध करा पाया जिसका लाभ जिओ जैसे ऑपरेटर्स को मिला। इसके पहले तक 4G फोन अपेक्षाकृत काफी महंगे थे।

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