10 गलतियां जो हम कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी के दौरान करते हैं। - Tech and Gyan-इंडिया का श्रेष्ठ हिंदी ब्लॉग- Technology (तकनीक) और ज्ञान की बातें हिंदी में

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10 गलतियां जो हम कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी के दौरान करते हैं।

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10 गलतियां जो हम कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी के दौरान करते हैं।

किसी भी कॉम्पिटीशन एग्जाम का स्वभाव एकेडमिक ( स्कूल तथा कॉलेज) एग्जाम की तुलना में भिन्न होता है अतः उससे निपटने की प्रक्रिया भी भिन्न होनी चाहिए। परंतु हम अपने जीवन के लगभग 20 साल एकेडमिक एग्जाम्स को देने में बिताते हैं, अतः हमारे स्वभाव में यह स्वतः ही आ जाता है और हम इसके आदी हो जाते हैं।

एकेडमिक दुनिया से बाहर आने के बाद जब हम किसी कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी करते हैं तो हम उसी पुराने ढर्रे को अपनाने का प्रयास करते हैं जो हमने एकेडमिक एग्जाम्स की तैयारी के दौरान अपनाया था जिस कारण हमारी बहुत सारी मेहनत कर चली जाती है और सिलेक्शन होने की प्रायिकता कम होती चली जाती है।

यहां में उन 10 गलतियों के बारे में चर्चा करूंगा जो करना आपके लिए हानिकारक सिद्ध होगा।अतः इनसे बचने की आवश्यकता है।


1. अच्छी मानक पुस्तकों का चयन ना करना


पढ़ाई के बारे में कहा जाता है कि किसी विषय पर बहुत सारी पुस्तकों को पढ़ने से बेहतर है एक ही पुस्तक को कई बार पढ़ा जाए। ऐसा करने से हमारे मन में कई बार यह विचार आ सकता है की बहुत सारी जानकारी हमें नहीं मिल पाएगी। यकीन मानिए यदि ऐसी जानकारी 10% है जो नहीं मिल पाएगी तो भी चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि बाकी की  90% जानकारी हमें बहुत अच्छे से मिल जाएगी और हमें उसके बारे में इतना ज्ञान होगा कि हम उसके बारे में परीक्षा में अच्छे से उत्तर दे पाएंगे और सफलता सुनिश्चित हो सकेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि तैयारी करते समय हम अपने शुभचिंतकों और विशेषज्ञों की सलाह से अच्छी पुस्तकों का चयन करें और उन्हीं का अध्ययन बार-बार करें। किताबों का ढेर लगाने से कोई लाभ नहीं होता। हां इस बात का ध्यान रखा जाना अति आवश्यक है कि वह पुस्तक संपूर्ण सिलेबस को बहुत अच्छे से कवर करती हो साथ ही उसके कंटेंट और प्रश्नों की गुणवत्ता बहुत उत्तम हो। इसलिए सलाह केवल उस क्षेत्र के विशेषज्ञों से ही लेनी चाहिए।


2. प्रश्नों के पैटर्न को जाने बिना ही तैयारी करते रहना


हम जिस भी कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी करते हैं उस में पूछे जाने वाले प्रश्नों को पहले ही देखे जाने की जरूरत है ताकि हम उसकी प्रकृति को समझ सकें अन्यथा हो सकता है तैयारी के दौरान हम उन प्रश्नों की तरफ कूद जाएं जिनका एग्जाम से कोई लेना देना नहीं है। ऐसा करने से हमारे ज्ञान में तो वृद्धि होगी परंतु मत भूलिए हमें ज्ञानी नहीं बनना है हमें कॉम्पिटीशन वाला एग्जाम निकालना है।


3. अपने मनपसंद विषय को ही पढ़ते रहना



हम सभी मनुष्य किसी खास विषय को अधिक पसंद करते हैं उदाहरण के लिए कोई गणित को अधिक पसंद करता है तो कोई इतिहास को तो कोई रीजनिंग को तो कोई अंग्रेजी को। परंतु कॉम्पिटीशन की तैयारी करते समय उन सभी विषयों को पढ़े जाने की जरूरत है जो उस एग्जाम में पूछे जाते हैं और सभी को हमारी उस विषय में समझ तथा उस परीक्षा में पूछे जाने वाले वेटेज के आधार पर वरीयता दिए जाने की जरूरत है। तो ऐसा कतई ना करें कि हमें जो विषय पसंद है हम उसी विषय को पढ़ते रहें तथा अन्य विषयों को कम पढ़े या दरकिनार करते रहें। हमें सभी विषयों को महत्वपूर्ण मानते हुए अपनी तैयारी करनी चाहिए।


4. केवल शॉर्टकट्स और ट्रिक्स को ही सीखने पर जोर देना



यह मनुष्य के स्वभाव में है कि वह सबसे आसान रास्ता अपनाता है और हमें सबसे आसान रास्ता दिखता है- शॉर्टकट्स। विशेष तौर पर गणित और रीजनिंग की तैयारी के दौरान हम मूलभूत सिद्धांतों को न सीख कर केवल सारा जोर जुगाड़, शॉर्टकट्स और ट्रिक्स पर डाल देते हैं। ऐसा करना आत्मघाती हो सकता है। यकीन मानिए आज के समय में जहां कॉम्पिटीशन हजारों लाखों में नहीं करोड़ों में पहुंच चुका है इस समय में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मूलभूत सिद्धांत के साथ शॉर्ट ट्रिक सीखते हैं तथा वहीं कुछ लोग केवल शॉर्टकट्स अपनाते हैं। तो आप खुद तय कर सकते हैं की कॉम्पिटीशन में किन लोगों के चयन की संभावना अधिक होगी।  दरअसल हम सभी प्रश्नों का उत्तर शॉर्टकट और ट्रिक से नहीं दे सकते कुछ प्रश्न ऐसे अवश्य होते हैं जहां पर मूलभूत सिद्धांतों की आवश्यकता होती है और हां इन सिद्धांतों को सीखना एक लंबी प्रक्रिया है इसलिए हम इससे बचते हैं परंतु यह सबसे स्थाई प्रक्रिया भी है। इसलिए गणित और रीजनिंग में मूलभूत सिद्धांतों को सीखने के पश्चात ही शॉर्टकट्स और ट्रिक्स की तरफ बढ़ना चाहिए।


5. आत्मविश्वास की कमी



तैयारी के दौरान कई बार ऐसा वक्त आ सकता है जब हम टॉपर्स बच्चों को देखकर आत्म हीनता का अनुभव कर सकते हैं और हमें ऐसा लग सकता है कि हम इनके सामने कहीं नहीं ठहरते तो फिर हम एग्जाम कैसे निकाल सकते हैं। वास्तव में हम उस कठोर परिश्रम को भूल जाते हैं जिसे करके वह टॉपर वहां तक पहुंचा होता है। यदि हम भी उतनी मेहनत करेंगे तो हम भी वहां तक पहुंचेंगे इस आत्मविश्वास के साथ ही हमें आगे बढ़ना चाहिए और तैयारी के दौरान कहीं से भी मन में शंका को घर नहीं बनाने देना चाहिए। यदि हम ऐसा करते हैं तो अपनी असफलता की कहानी लिखने की शुरुआत हम खुद से करते हैं।


6. अति आत्मविश्वास में आ जाना



आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास में बहुत बारीक रेखा होती है। रेखा के इस पार आत्मविश्वास तथा उस पार अहंकार होता है। इस पूरी दुनिया में हमने अपनी आंखों से बहुत छोटा सा हिस्सा ही देखा होता है जिससे हम स्वयं की तुलना करके कई बार अहंकार में आ जाते हैं और उस दुनिया को या कहें कि दुनिया के उन लोगों को भूल जाते हैं जिनसे हम मिले ही नहीं या जिनको हमने देखा ही नहीं। इसलिए कभी भी किसी भी परिस्थिति में अहंकार को अपने सिर पर हावी नहीं होने देना चाहिए क्योंकि जिस दिन यह हमारे सिर पर हावी हो जाएगा यह हमारे दिमाग का ढक्कन बंद कर देगा और आगे सीखने की प्रक्रिया को शिथिल कर देगा। क्योंकि यह स्वीकार कर लेगा कि उसे सब आ गया और आगे कुछ भी सीखने की आवश्यकता नहीं है।


7. आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास



आपने यह हिंदी की मशहूर कहावत तो सुनी होगी इसका अर्थ है कि हम वर्तमान में जिस उद्देश्य के लिए आए हैं उसे छोड़कर दूसरा काम करने लग जाएँ । अर्थात यदि हमने अपने जीवन के 1 साल को कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी के लिए देने का मन बनाया है तो इस दौरान अपने आप को उसके लिए समर्पित करने की आवश्यकता है कई बार हम इस उद्देश्य को भूलकर अन्य निरर्थक कार्यों में लग जाते हैं जैसे शादियों में पार्टियों में जाना, रिश्तेदारयां निभाना,निरुद्देश्य यहाँ वहां जाना, प्रेम में पड़ जाना इत्यादि। यदि हम ऐसा करते हैं तो सफलता की संभावना को कम करते चले जाते हैं।


8. पूर्व धारणा की पथरीली दीवार बना लेना



कई बार किसी विषय को लेकर अथवा चैप्टर को लेकर हम ऐसी पूर्व धारणा बना लेते हैं कि यह हम से नहीं होगा या हम इसे इतने अच्छे से नहीं सीख सकते। जबकि वास्तव में कोई भी विषय अभ्यास से सरल हो जाता है। यदि हमने किसी विषय के बारे में ऐसी धारणा बना रखी है इसका अर्थ यह हुआ कि हमें उस विषय में अधिक अभ्यास की आवश्यकता है परंतु इसका अर्थ यह कतई नहीं है, कि वह हमारे लिए दुष्कर है या जिसे हम प्राप्त कर ही नहीं सकते। अतः ऐसे विषयों को या ऐसे चैप्टर को विशेष तौर पर ढूंढ कर निकाले जाने की जरूरत है जो हमें कठिन लगते हैं तथा उस पर विशेष रूप से अभ्यास करके उसे सरल बनाने की आवश्यकता है ताकि सफलता के संभावनाओं को बढ़ाया जा सके।


9. पर्याप्त संख्या में टेस्ट सीरीज का अभ्यास ना करना



यदि हम सालों तक क्रिकेट खेलने की किताब पढ़ते रहें अथवा तैरना सीखने की किताब पढ़ते रहें तो कभी भी क्रिकेट खेलना या तैरना नहीं सीख सकते हैं हां हम उसके ज्ञानी अवश्य हो सकते हैं। यही बात कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी सत्य है। कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी करने के दौरान टेस्ट सीरीज को देते रहना चाहिए ताकि वास्तविकता में हम खुद की स्थिति का आकलन कर सकें और उसके अनुरूप स्वयं को परिवर्तित कर सकें। यदि हमारी तैयारी पूरी हो चुकी है तो भी टेस्ट सीरीज के माध्यम से अभ्यास करते रहना चाहिए अन्यथा सफलता मिलनी मुश्किल होगी।


10. तैयारी के दौरान टाइम मैनेजमेंट ना करना


समय ही धन है अपने यह कहावत जरूर सुनी होगी। वास्तव में जो लोग अपने समय का सदुपयोग करना सीख जाते हैं वो जीवन में, कॉम्पिटीशन एग्जाम में ही सफल नहीं होते, बल्कि वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल होते हैं। अतः कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी के दौरान अपने समय का भरपूर और सही तरीके से उपयोग करें और यह मानकर चलें कि उस दौरान आपका केवल एक ही उद्देश्य है जिसके लिए समय निर्धारित है और यह समय अगर एक बार चला जाएगा तो फिर इस रूप में कभी वापस नहीं आएगा।  तुरंत लागू होने वाली टाइम मैनेजमेंट की 10 तरकीबों  को जानने के लिए इस बारे में लिखा मेरे ब्लॉग का आर्टिकल अवश्य पढ़ें जिसका लिंक नीचे दिया गया है


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