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मोबाइल फ़ोन व उसकी चार्जिंग से जुड़े 13 मिथक


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मोबाइल फ़ोन व उसकी चार्जिंग से जुड़े 13 मिथक 


आज के वर्तमान समय में लगभग सभी लोग अपने पास मोबाइल फोन रखते हैं। वह सुबह उठने से लेकर रात के सोने तक न जाने कितनी बार अलग-अलग कामों के लिए उसका प्रयोग करते हैं। नए मोबाइल फोन के खरीदने से लेकर उसके समाप्त होने तक कई बार बहुत सारी जानकारी गलत रूप में हमारे पास होती है। आज हम उन्हीं मिथक के ऊपर चर्चा करेंगे जिनमें से कई सारे हम खुद मानते हैं अथवा इस बारे में अन्य लोगों से सुनते रहते हैं।

1. नए मोबाइल फोन का प्रयोग करने से पूर्व उसे पूरी तरह चार्ज कर लेना चाहिए।


जब भी हम नया मोबाइल फोन खरीदते हैं तो वह पहले से ही लगभग आधा चार्ज होता है। उसे बेचने वाली कंपनियां हमें प्रयोग करने से पूर्व उसे पूरी तरह चार्ज करने की सलाह देती हैं। वास्तव में यह सलाह केवल उपभोक्ता के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए होती है। वास्तव में फोन का प्रयोग करने से पूर्व उसे पूरी तरह चार्ज करने की कोई आवश्यकता नहीं है। वह जितना चार्ज है हम उतने में ही उसका प्रयोग प्रारंभ कर सकते हैं ।परंतु कई बार जब हम फोन को प्रारंभ करते हैं तो वह इंटरनेट से कनेक्ट होने के बाद अपडेट करने के लिए कहता है जिसके लिए बैटरी का एक निश्चित प्रतिशत से अधिक चार्ज होना आवश्यक है। उस परिस्थिति में हमें अपडेट को टाल देना चाहिए अन्यथा नए फोन को पूरी तरह चार्ज करके ही प्रयोग करना चाहिए।

2. ज्यादा मेगापिक्सल का कैमरा अर्थात ज्यादा बेहतर तस्वीर।


मोबाइल फोन की दुनिया में कैमरा वीजीए अर्थात 0.3 मेगापिक्सल से प्रारंभ होकर 148 मेगापिक्सल तक पहुंच चुका है और इसके आगे ना जाने यह दौर कहां जाकर खत्म होगा पर क्या वास्तव में मेगापिक्सल बेहतर तस्वीर का पैमाना है, नहीं वास्तव में मेगापिक्सल का संबंध बेहतर तस्वीर की गुणवत्ता से नहीं बल्कि उसके आकार से है। जितने ज्यादा मेगापिक्सल का कैमरा होगा उस कैमरे से खींची गई तस्वीर भी उतनी ही बड़ी होगी। परंतु यदि कम मेगापिक्सल के कैमरे से तस्वीर खींचकर उसे बड़ा किया जाए तो वह तस्वीर पिक्सल साइज के बड़े होने के कारण गुणवत्ता में खराब हो जाती है। परंतु अपने दैनिक जीवन में हम जितनी बड़ी तस्वीर का प्रयोग करते हैं, उसके लिए बहुत अधिक मेगापिक्सल के कैमरे की कोई आवश्यकता नहीं है। बेहतर तस्वीर अन्य कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे कैमरे के सेंसर की गुणवत्ता, इनपुट लाइटनिंग क्षमता, सेंसर का प्रकार इत्यादि।

3. फोन को पूरी रात चार्जिंग में लगा कर नहीं छोड़ना चाहिए।


आज के समय में जितने भी मोबाइल फोन उपलब्ध है वह सभी फुल चार्ज होने के बाद चार्ज होने की प्रक्रिया को बंद कर देते हैं। जिस कारण मोबाइल फोन ओवर चार्ज नहीं होता है। इसलिए यदि हम फोन को पूरी रात चार्जिंग में लगा कर छोड़ भी देते हैं तो भी हमें चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। फोन जैसे ही फुल चार्ज हो जाएगा वह चार्जिंग बंद कर देगा भले ही वह चार्जिंग सॉकेट में कितनी देर तक लगा रहे।


4. आईफोन की तुलना में एंड्रॉयड डिवाइस में वायरस का खतरा अधिक होता है।


जिस प्रकार एंड्रॉयड डिवाइस में एप्स को डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर होता है उसी प्रकार आईफोन में भी एप्पल का ऐप स्टोर होता है आईफोन केवल अपने स्टोर से एप्स को डाउनलोड करके प्रयोग करने की अनुमति देता है परंतु एंड्राइड अपने स्टोर के अलावा अन्य जगहों से उपलब्ध एप्स को भी प्रयोग करने की अनुमति देता है आईफोन में विशेष विधियों का प्रयोग करके हम अलग से एप्स को डाउनलोड कर सकते हैं परंतु यह विधि एप्पल कंपनी द्वारा मान्य नहीं है इसलिए यदि हम इन एप स्टोर ओं के अलावा अन्य किसी माध्यम से एप्स डाउनलोड करके प्रयोग करते हैं तो वायरस का खतरा समान रूप से है अतः यह एक भ्रम है एंड्राइड डिवाइस में वायरस का खतरा एप्पल की तुलना में अधिक है।

5. 4जी तकनीक 3जी तकनीक की तुलना में अधिक डेटा की खपत करती है।


4जी तकनीक में डाटा की स्पीड 3G की तुलना में बहुत अधिक होती है परंतु इसका ट्रांसफर होने वाली फाइल के आकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उदाहरण के लिए यदि कोई फाइल 10 एमबी की है और उसे हम 3G में डाउनलोड करें तथा 4G में डाउनलोड करें तो 4जी तकनीक में फाइल जल्दी डाउनलोड होगी जबकि 3जी तकनीक में अपेक्षाकृत धीमी गति से। परंतु 10 एमबी की फाइल 10 एमबी की ही रहेगी। अतः यह झूठ है की 4जी तकनीक 3G की तुलना में अधिक डेटा की खपत करती है।


6. चार्जिंग के समय मोबाइल फोन का प्रयोग किसी कार्य के लिए नहीं करना चाहिए।


यदि हम अपने मोबाइल फोन को किसी भी मानक चार्जर से चार्ज करते हैं तो उस दौरान फोन के कार्य करने की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अतः चार्जिंग के दौरान भी हम अपने फोन का प्रयोग बिना किसी समस्या के कर सकते हैं। परंतु यदि चार्जर घटिया गुणवत्ता का है तो चार्जिंग के समय प्रयोग करने से कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं। यहां तक कि दुर्घटना भी संभव है। अतः अच्छी गुणवत्ता वाले मानक चार्जर का प्रयोग करने से कोई समस्या नहीं होगी।

7. सस्ते घटिया चार्जर से मोबाइल फोन को चार्ज करने से कोई फर्क नहीं पड़ता।


वास्तव में मोबाइल फोन के चार्जिंग के लिए वोल्टेज और करंट रेटिंग निर्धारित होती है सस्ते घटिया चार्जर इस निर्धारित रेटिंग का पूरी तरह पालन नहीं करते जिस कारण मोबाइल फोन की चार्जिंग क्षमता पर बुरी तरह प्रभाव पड़ता है इसके अतिरिक्त इसके प्रयोग से बैटरी की लाइफ कम होती रहती है तथा कई बार ओवरहीटिंग के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है इसलिए हमें सस्ते घटिया चार्जर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

8. मोबाइल फोन को चार्ज करने के लिए केवल ओरिजिनल चार्जर का ही प्रयोग करना चाहिए।


किसी भी मोबाइल फोन को चार्ज करने के लिए उसकी वोल्टेज और करंट रेटिंग पहले से निर्धारित होती है। यदि हम उसी वोल्टेज और करंट रेटिंग के मानक चार्जर का प्रयोग करते हैं तो उसका प्रयोग करने में कोई समस्या नहीं है। इसलिए हमें हर बार ओरिजिनल चार्जर का प्रयोग करने की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है। हम अन्य चार्जर का उपयोग भी कर सकते हैं परंतु यह मानक रेटिंग के अनुरूप होना चाहिए।

9. पावर बैंक से फोन को चार्ज करना उसे नुकसान पहुंचा सकता है।


वर्तमान समय में अच्छी गुणवत्ता वाले पावर बैंक अपने करंट ट्रांसफर करने की क्षमता को फोन की मांग के अनुसार परिवर्तित कर लेते हैं। जिस कारण फोन को जितने करंट की आवश्यकता होती है वह उतना ही करंट फोन को उपलब्ध कराता है। इसलिए पावर बैंक से फोन को चार्ज करने से फोन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसके अतिरिक्त पावर बैंक में कई लेयर में प्रोटेक्शन सर्किट लगाया जाता है, ताकि फोन के सर्किट को नुकसान होने से बचाया जा सके। परंतु घटिया गुणवत्ता वाले पावर बैंक के द्वारा मानकों का पालन ठीक से ना किए जाने के कारण फोन को नुकसान पहुंच सकता है।

10. पब्लिक चार्जिंग पोर्ट पूरी तरह सुरक्षित होते हैं।


कई बार हम अपने मोबाइल फोन को पब्लिक चार्जिंग पोर्ट का प्रयोग करके चार्ज करते हैं। यह पब्लिक चार्जिंग पोर्ट सामान्य चार्जर से अलग होते हैं। कुछ लोग इसका प्रयोग करके हमारे फोन में घुस सकते हैं। जिससे हमारे फोन में उपलब्ध डाटा को खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए इसका प्रयोग करने की बजाय पोर्टेबल चार्जर का प्रयोग करना बेहतर है।

11. फोन के पूरा डिस्चार्ज होने पर ही उसे पुनः चार्ज करना चाहिए।


वर्तमान समय में सभी मोबाइल फोन लिथियम आयन तकनीक से बनी बैटरी का प्रयोग करते हैं। इस बैटरी को पूरी तरह डिस्चार्ज करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बल्कि हम जब भी जरूरत महसूस करें इसे आवश्यकतानुसार चार्ज कर सकते हैं। साथ ही कोशिश करनी चाहिए की बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज ना हो।हालांकि मोबाइल फोन में उपलब्ध तकनीक उसकी बैटरी को पूरी तरह डिस्चार्ज होने से पूर्व ही फोन को स्विच ऑफ कर देती है ताकि बैटरी को डैड मोड में जाने से बचाया जा सके।

12. फास्ट चार्जर का प्रयोग फोन को नुकसान पहुंचा सकता है।


हम फास्ट चार्जर का प्रयोग करके सामान्य मोबाइल फोन को भी चार्ज कर सकते हैं। फास्ट चार्जर की सेल्फ मैनेजमेंट तकनीक फोन की आवश्यकता के अनुसार ही करंट को प्रवाहित करता है। इसलिए सामान्य फोनों को भी यदि फास्ट चार्जर का प्रयोग करके चार्ज किया जाए तो कोई नुकसान नहीं है।

13. इनकॉग्निटो मोड हमारी निजता को सुरक्षित रखता है।


जब हम इनकॉग्निटो मोड  में इंटरनेट का प्रयोग करते हैं, तब ब्राउज़र अथवा ऐप हमारी कैश,कुकीज़, पासवर्ड तथा अन्य जानकारियों को साझा नहीं करता है। परंतु हमारा इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर इन सभी जानकारियों पर निगाह रख सकता है। अतः इनकॉग्निटो मोड में भी हम पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहते।


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