Carrier Aggregation (कैरियर एग्रीगेशन)-4G के बाद अगली डेटा क्रांति - Tech and Gyan-इंडिया का श्रेष्ठ हिंदी ब्लॉग- Technology (तकनीक) और ज्ञान की बातें हिंदी में

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Carrier Aggregation (कैरियर एग्रीगेशन)-4G के बाद अगली डेटा क्रांति

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Carrier Aggregation-4G के बाद अगली डेटा क्रांति

Carrier aggregation अर्थात वाहक एकत्रीकरण का तात्पर्य उस तकनीक से है, जिसका प्रयोग कर विभिन्न आवृत्तियों के समूहन से उच्च डाटा ट्रांसफर दर अर्थात (throughput) प्राप्त किया जा सके। इसके बारे में अधिक समझने के लिए हमें मॉडुलेशन और डिमॉडुलेशन को पहले समझना होगा।

मॉडुलेशन और डिमॉडुलेशन

जब हम किसी सिग्नल अर्थात संकेत को सुदूर स्थान पर भेजते हैं तो हम उस संकेत को किसी उच्च आवृत्ति के सिग्नल के ऊपर अध्यारोपित करते हैं। हम जिस सिग्नल को भेजते हैं वह मैसेज सिग्नल कहलाता है तथा जो उच्च आवृत्ति उस सिग्नल को अपने साथ लेकर के जाती है उसे कैरियर सिग्नल कहते हैं तथा अध्यारोपण की यह प्रक्रिया मॉडुलेशन कहलाती है।


Message Signal+Carrier Signal=Modulation



रेडियो संकेतों में इसी का प्रयोग करके संकेतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है। रेडियो डिवाइस इन संकेतों को प्राप्त करके मैसेज सिग्नल को कैरियर सिग्नल से अलग कर लेता है। अलग करने की यही प्रक्रिया डिमॉडुलेशन कहलाती है।और अंततः रेडियो केवल मैसेज सिग्नल को स्पीकर के माध्यम से हमें प्रदान करता है।



Message Signal-Carrier Signal=Demodulation


एफएम रेडियो का उदाहरण

आप सभी लोग रेडियो का प्रयोग समाचार अथवा संगीत सुनने के लिए करते ही होंगे। आपने रेडियो सिटी 91.1 एफएम, रेडिओ मिर्ची 98.3 एफएम आदि रेडियो स्टेशनों का नाम सुना ही होगा। इन नामों में 91.1, 98.3 नंबर दरअसल उस रेडियो स्टेशन की आवृत्ति को बताते हैं। जैसे रेडियो सिटी स्टेशन 91.1 मेगा हर्ट्ज आवृत्ति का प्रयोग अपने संकेतों को भेजने के लिए करता है, उसी प्रकार रेडियो मिर्ची 98.3 मेगा हर्ट्ज आवृत्ति का प्रयोग करता है तथा इसी प्रकार अन्य स्टेशन भी किसी ना किसी आवृत्ति का प्रयोग करते हैं। एक आवृत्ति का प्रयोग एक ही भौगोलिक क्षेत्र में केवल एक ही रेडियो स्टेशन कर सकता है।

मोबाइल फोन का उदाहरण

इसी मॉडुलेशन तथा डिमॉडुलेशन तकनीक का प्रयोग हमारे मोबाइल फोन में भी होता है। हम जिस भी आवृत्ति का प्रयोग कैरियर सिग्नल के रूप में करते हैं उसकी उच्च सीमा तथा निम्न सीमा निर्धारित होती है।
आवृति कि उच्च सीमा तथा निम्न सीमा के अंतर को ही बैंडविर्थ कहते हैं।

आवृत्ति की उच्च सीमा-आवृत्ति की निम्न सीमा= बैंडविर्थ


अधिक बैंडविर्थ होने पर उसमें डाटा ट्रांसफर की दर अधिक होती है जबकि कम बैंडविर्थ होने पर उसमें डाटा ट्रांसफर की दर कम होती है। साथ ही बैंडविर्थ के अलावा यह तकनीक पर भी निर्भर करती है। उदाहरण के लिए एक ही बैंडविथ का प्रयोग 3G की तुलना में 4जी में अधिक दक्ष तरीके से किया जाता है जिस कारण 4जी में 3G की तुलना में अधिक डाटा ट्रांसफर स्पीड प्राप्त हो पाती है। परंतु एक विशेष आवृत्ति के लिए बैंडविर्थ निश्चित होती है, अतः हमें एक भौगोलिक क्षेत्र में अधिक लोगों को सर्विस प्रदान करने के लिए कई अलग-अलग आवृत्ति का प्रयोग करना पड़ता है। परंतु हमारा मोबाइल फोन एक बार में एक ही आवृत्ति का प्रयोग करता है जो आवृत्ति सबसे अधिक सिगनल लेवल के साथ फोन को प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया में अन्य आवृत्ति रिक्त रह जाती हैं तथा उसका दक्षता पूर्वक प्रयोग नहीं हो पाता।

जिओ मोबाइल फोन ऑपरेटर का उदाहरण


उदाहरण के लिए जिओ मोबाइल ऑपरेटर जोकि पूर्णतया 4G सर्विस प्रदाता है। वह अलग अलग तीन आवृत्ति बैंड का प्रयोग करता है। जोकि 850 मेगा हर्ट्ज, 1800 मेगा हर्ट्ज तथा 2300 मेगा हर्ट्ज है। हमारा मोबाइल फोन एक बार में इनमें से केवल एक ही आवृत्ति का प्रयोग करता है। 850 मेगा हर्ट्ज की रेंज दूर तक होती है परंतु डाटा ट्रांसफर दर कम होती है जबकि 2300 मेगा हर्ट्ज की रेंज कम होती है परंतु डाटा ट्रांसफर दर अधिक होती है। कैरियर एग्रीगेशन तकनीक के प्रयोग से मोबाइल फोन केवल एक आवृत्ति का प्रयोग ना करके एक ही समय में दो या दो से अधिक आवृत्तियों को एक साथ प्रयोग करता है जिससे डाटा ट्रांसफर की दर पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और यूजर अर्थात उपभोक्ता का अनुभव बहुत बेहतर बनता है। वर्तमान में सभी मोबाइल फोन इस तकनीक का समर्थन नहीं करते परंतु भविष्य में सभी फोन इस तकनीक का समर्थन करने वाले होंगे साथ ही मोबाइल ऑपरेटर भी अपने इकोसिस्टम में इस तकनीक के समर्थन वाली डिवाइस का प्रयोग करने लगेंगे।

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